Hadis : Sahih Bukhari (5)

 सहीह बुखरी (5)


📜 हदीस की रौशनी मे: एक सच्चे मुसलमान के गुण और इस्लाम के बेहतरीन कार्य

🕌  इस्लाम की खूबसूरती और समाज मे जिम्मेदारी

 👉 ये हदीसें एक सच्चे आस्तिक के मौलिक गुणों और इस्लाम के सर्वोत्तम कार्यों पर प्रकाश डालती हैं। वे हमें सिखाती हैं कि धर्म केवल व्यक्तिगत पूजा नहीं है, बल्कि एक सामाजिक आचार संहिता भी है।

 🔷 हृदय और कार्य: इमान और इस्लाम को केवल कलमा (विश्वास की घोषणा) से नहीं मापा जाता, बल्कि हमारे व्यवहार और दूसरों के प्रति कर्तव्यों से मापा जाता है।

🔑 मुख्य हदीस और उनके विषय

👉बाब 4: मुसलमान वह है जिसकी ज़ुबान और हाथ से दूसरे मुसलमान बचे रहें :

 👉मूल शिक्षा: नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: "मुसलमान वह है जिसकी ज़ुबान और हाथ से मुसलमान बचे रहें, और मुहाजिर वह है जो उन कामों को छोड़ दे जिनसे अल्लाह ने मना फ़रमाया।"

 🔷ज़ुबान और हाथ का महत्व:

   ⚡ज़ुबान (वाणी): चुगली, बदनामी, झूठे आरोप, अपमानजनक शब्द, व्यंग्य, और गाली-गलौज से बचना। एक शब्द भी किसी का दिल दुखा सकता है या सामाजिक नुकसान कर सकता है।

   ⚡हाथ (कर्म): शारीरिक क्षति, चोरी, धोखा, ज़ुल्म, या किसी भी प्रकार का भौतिक नुकसान पहुँचाने से बचना।

  👉यह हदीस अहिंसा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नींव रखती है। आपका व्यवहार ही आपकी धार्मिकता का असली प्रमाण है।

 ⚡मुहाजिर की परिभाषा: यहाँ मुहाजिर (प्रवासी) को केवल भौगोलिक प्रवास से नहीं जोड़ा गया है, बल्कि पाप और बुराई से दूर रहने वाले व्यक्ति से जोड़ा गया है। यह एक आंतरिक हिजरत है, जिसमें व्यक्ति उन चीज़ों को त्याग देता है जिनसे अल्लाह राज़ी नहीं होता।

2. बाब 5: इस बयान में कि कौनसा इस्लाम अफ़ज़ल है (सर्वाेत्तम है)

⚡मूल प्रश्न और उत्तर: लोगों ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पूछा: "कौनसा इस्लाम अफ़ज़ल है?" आपने फ़रमाया: "जिसके मानने वाले को ज़ुबान और हाथ से और सारे मुसलमान सलामती में रहें।"

 ⚡सर्वोत्तम इस्लाम: सबसे बेहतर मुसलमान वह नहीं है जो सबसे ज़्यादा नमाज़ पढ़ता है या रोज़े रखता है (जबकि वे अनिवार्य हैं), बल्कि वह है जो दूसरों के लिए सबसे ज़्यादा सुरक्षित है।

 ⚡सादृश्य: यदि आपका पड़ौसी आपकी ज़ुबान और आपके हाथों से सुरक्षित महसूस नहीं करता है, तो आपका ईमान कमजोर  है। यह दूसरों की सुरक्षा और कल्याण को इस्लाम की सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में स्थापित करता है।

3. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नें फरमाया

 👉मूल शिक्षा: "तुममें से कोई शख़्स ईमान वाला न होगा जब तक कि अपने भाई के लिए वो न चाहे जो अपनी नफ़्स के लिए चाहता है।"

 👉ईमान का पैमाना: यह हदीस भाईचारा (Brotherhood) और समानुभूति (Empathy) की नींव है।

 👉स्व-प्रेम को सामाजिक प्रेम में बदलना: अपने लिए आप जो अच्छा चाहते हैं (सुरक्षा, सम्मान, खुशी, समृद्धि), वही आपको दूसरों के लिए भी चाहना चाहिए।

 👉व्यावहार : यदि आप नहीं चाहेंगे कि कोई आपका सामान चुराए, तो आपको किसी का सामान नहीं चुराना चाहिए। यदि आप नहीं चाहेंगे कि कोई आपकी चुगली करे, तो आपको किसी की चुगली नहीं करनी चाहिए। यह सामाजिक न्याय और पारस्परिक सम्मान का सबसे सरल और शक्तिशाली सूत्र है।

🎯 इस्लाम :

 👉इस्लाम का वास्तविक संदेश: इस्लाम शांति (सलामती) का धर्म है, और यह शांति सबसे पहले इंसान के व्यक्तिगत आचरण में झलकनी चाहिए।

 👉बुराई का छोड़ना : न केवल अच्छे काम करना, बल्कि बुरे कर्मों (ज़ुबान और हाथ के बुरे काम) को सक्रिय रूप से छोड़ना भी इबादत है।

 👉सामाजिक नैतिकता की सर्वोच्चता: इन हदीसों के अनुसार, एक अच्छा मुसलमान होने का मतलब केवल व्यक्तिगत रूप से धार्मिक होना नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार, भरोसेमंद, और नुकसान न पहुँचाने वाला इंसान होना है।

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