जन औषधि केंद्र
सस्ती दवाओं की क्रांतिकारी पहल आज के समय में बढ़ती महंगाई के कारण आम आदमी के लिए इलाज कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है। महंगी दवाइयों और इलाज के खर्च ने गरीब और मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत जन औषधि केंद्र की शुरुआत की।
जन औषधि केंद्रों का मुख्य उद्देश्य
आम जनता को उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाइयाँ कम कीमत पर उपलब्ध कराना है, ताकि कोई भी व्यक्ति केवल पैसों की कमी के कारण इलाज से वंचित न रहे। --- जन औषधि केंद्र क्या है? जन औषधि केंद्र ऐसे मेडिकल स्टोर होते हैं जहाँ जेनेरिक दवाइयाँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इन केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयाँ वही होती हैं जो महंगे ब्रांड नाम से बाजार में बिकती हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि इनमें ब्रांडिंग और मार्केटिंग का खर्च नहीं जुड़ा होता।
👉जन औषधि केंद्र शुरू करने का उद्देश्य
आम नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ उपलब्ध कराना गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना इलाज के खर्च को कम करना जेनेरिक दवाओं के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना
👉 जन औषधि केंद्र पर कौन-कौन सी दवाइयाँ मिलती हैं?
जन औषधि केंद्रों पर लगभग 1800+ दवाइयाँ और 300+ सर्जिकल आइटम उपलब्ध हैं, जिनमें शामिल हैं: बुखार, सर्दी, खांसी की दवाइयाँ डायबिटीज, बीपी और हार्ट की दवाइयाँ एंटीबायोटिक्स दर्द निवारक दवाइयाँ आयुर्वेदिक उत्पाद सैनिटरी नैपकिन सर्जिकल आइटम (सिरिंज, बैंडेज, ग्लूकोमीटर आदि)
💡 जन औषधि केंद्र की दवाइयाँ सस्ती क्यों होती हैं? बहुत से लोगों के मन में सवाल होता है कि जन औषधि केंद्र की दवाइयाँ इतनी सस्ती क्यों होती हैं। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:
1. ये दवाइयाँ जेनेरिक नाम से बेची जाती हैं
2. ब्रांड प्रमोशन और विज्ञापन का खर्च नहीं होता
3. सरकार द्वारा गुणवत्ता की सख्त जांच की जाती है
4. थोक स्तर पर खरीद की जाती है
👉जन औषधि केंद्र से मिलने वाले फायदे
जन औषधि केंद्र से आम जनता को कई बड़े फायदे मिलते हैं: 50% से 90% तक सस्ती दवाइयाँ WHO-GMP प्रमाणित कंपनियों की दवाइयाँ गरीब और मध्यम वर्ग के लिए राहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा हर वर्ग के लोगों के लिए समान इलाज
👉 जन औषधि केंद्र कैसे खोलें?
यदि आप जन औषधि केंद्र खोलना चाहते हैं तो यह आपके लिए एक अच्छा रोजगार और सेवा का अवसर हो सकता है। पात्रता (Eligibility) आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए • न्यूनतम 10वीं पास फार्मासिस्ट डिग्री या रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट 120 से 150 वर्ग फुट की दुकान आवेदन प्रक्रिया
1. आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन
2. आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें
3. आवेदन की जांच
4. स्वीकृति के बाद केंद्र का आवंटन
जन औषधि केंद्र खोलने में लागत जन औषधि केंद्र खोलने में अनुमानित खर्च
• फर्नीचर और रैक: ₹50,000 – ₹1,00,000
• शुरुआती दवा स्टॉक: ₹2,00,000
• कुल अनुमानित लागत: ₹2.5 – ₹3 लाख
सरकार द्वारा कई श्रेणियों में ₹2 लाख तक की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
जन औषधि केंद्र से कमाई कितनी होती है?
जन औषधि केंद्र पर औसतन 20% तक मार्जिन मिलता है। अगर केंद्र सही स्थान पर है तो महीने में ₹30,000 से ₹60,000 या उससे अधिक की कमाई संभव है।
जन औषधि केंद्र बनाम ब्रांडेड मेडिकल स्टोर तुलना
जन औषधि केंद्र ब्रांडेड मेडिकल दवाइयों की कीमत बहुत कम बहुत ज्यादा गुणवत्ता समान समान ब्रांडिंग नहीं होती है आम जनता के लिए बहुत लाभदायक महंगा
जन औषधि केंद्र से जुड़े कुछ मिथक मिथक:
• सस्ती दवाइयाँ खराब होती हैं सच्चाई
• जन औषधि की दवाइयाँ पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित होती हैं मिथक
• ये दवाइयाँ असर नहीं करती सच्चाई
• जेनेरिक दवाइयाँ उतनी ही प्रभावी होती हैं जितनी ब्रांडेड दवाइयाँ
जन औषधि केंद्र का भविष्य सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर जिले और ग्रामीण क्षेत्र में जन औषधि केंद्र खोले जाएँ। आने वाले समय में इन केंद्रों की संख्या और दवाइयों की रेंज दोनों बढ़ाई जाएगी।
निष्कर्ष :
जन औषधि केंद्र न केवल एक सरकारी योजना है बल्कि यह स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक सामाजिक क्रांति है। यह योजना गरीब, मध्यम वर्ग और ग्रामीण भारत के लिए वरदान साबित हो रही है। यदि आप सस्ती दवाइयों के साथ समाज सेवा करना चाहते हैं, तो जन औषधि केंद्र आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
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Good
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