Hadis : Shahi Bukhari (4)

 ❤️ सच्चे मोमिन की पहचान❤️

ईमान, इबादत और बेहतरीन अख़लाक़


तस्वीरों में दिए गए पवित्र मार्गदर्शन में, इस्लाम की नींव और एक सच्चे मोमिन के गुणों पर ज़ोर दिया गया है। यह हमें सिखाता है कि नेकी केवल कुछ रस्मों को अदा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे दिल के विश्वास और समाज के प्रति हमारे व्यवहार का एक संपूर्ण पैकेज है।

🔷 इस्लाम की बुनियाद

हदीस संख्या (8) के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर टिकी हुई है। ये पाँच स्तंभ किसी भी मुसलमान के जीवन का आधार हैं:

 👉शहादा: गवाही देना कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अल्लाह के सच्चे रसूल हैं।

 👉नमाज़: पाबंदी से नमाज़ (सलात) कायम करना।

 👉ज़कात: अनिवार्य दान (ज़कात) अदा करना।

 👉हज: हज करना (अगर सक्षम हो)।

 👉रोज़े: रमज़ान के महीने में रोज़े रखना (सौम)।

यह हमें याद दिलाता है कि इस्लाम सिर्फ़ एक नाम नहीं, बल्कि इन बुनियादी इबादतों पर अमल करने का नाम है।

🔷असली नेकी (ईमान) की कसौटी

एक और इबारत में, कुरआन की आयत (सूरह अल-बकरा की आयत 177 की व्याख्या प्रतीत होती है) की रौशनी में असली नेकी की परिभाषा दी गई है। नेकी सिर्फ़ किबला की तरफ़ मुँह करने में नहीं है, बल्कि उन लोगों में है जो:

 👉अल्लाह पर ईमान लाते हैं।

 👉क़यामत के दिन, फ़रिश्तों, आसमान से नाज़िल हुई किताबों और तमाम नबियों पर सच्चा यकीन रखते हैं।

 👉माल ख़र्च करते हैं: वे अल्लाह की मुहब्बत में हाजतमंदों, यतीमों, रिश्तेदारों, मुसाफ़िरों, और ग़ुलामी से आज़ाद कराने के लिए अपना माल देते हैं।

 👉इबादत और अख़लाक़: नमाज़ की पाबंदी करते हैं, ज़कात देते हैं, वादा पूरा करते हैं, और किसी विपत्ति पर सब्र व शुक्र करते हैं।

ये गुण बताते हैं कि सच्चा ईमान दिल के विश्वास को सामाजिक ज़िम्मेदारी और नैतिक आचरण से जोड़ता है।

🔷 कामयाब मोमिन के गुण आगे की इबारत उन लोगों के लिए बेहतरीन खुशख़बरी है जिन्हें सच्चा मोमिन और परहेज़गार कहा गया है। ये वही लोग हैं जो कामयाब होंगे और जन्नतुल फ़िरदौस (स्वर्ग) के वारिस बनेंगे। उनके मुख्य गुण हैं:

 👉नमाज़ में ख़ुशू' और ख़ुज़ू': अपनी नमाज़ें पूरी एकाग्रता और विनम्रता के साथ अदा करना।

 👉 लग़्व बातों से दूरी: फ़ुज़ूल और बेमतलब की बातों से दूर रहना।

 👉ज़कात से पाकीज़गी: अपनी संपत्ति और आत्मा को ज़कात के माध्यम से पाक करना।

 👉शर्मगाहों की हिफ़ाज़त: अपनी इज़्ज़त और पाकदामनी की पूरी तरह से हिफ़ाज़त करना, सिवाय वैध साथी के।

 👉अमानत और अहद का ख्याल: अमानत में ख़यानत न करना और किए गए वादों को पूरा करना।

💡यह मार्गदर्शन हमें स्पष्ट करता है कि इस्लाम एक संतुलित जीवन-प्रणाली है। यह हमें अल्लाह पर अटल विश्वास रखने, बुनियादी इबादतों को पूरी पाबंदी से अदा करने, और साथ ही समाज के प्रति दयालुता, आर्थिक सहायता (ज़कात), और उच्च नैतिक मूल्यों को अपनाने का आदेश देता है। यही वो रास्ता है जो बंदे को दुनिया में कामयाबी और आख़िरत में जन्नतुल फ़िरदौस की विरासत दिलाएगा।

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