Hadis : Sahih Bhukhari (2)

 🔷 सहीह बुख़ारी की एक अजीम हदीस 🔷

(जिसमें रोमन बादशाह हिरक़ल (Heraclius) और अबू सुफ़यान की बातचीत ।) 


👉यह उस समय का वाकिया है जब पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हिरक़ल को इस्लाम क़बूल करने की दावत भेजी थीं ।

📜 रोमन सम्राट हिरक़ल और अबू सुफ़यान की ऐतिहासिक बातचीत: जब हक़ सामने आया 🕌

इतिहास गवाह है कि हक़ का सामना चाहे एक साधारण आदमी करे या एक बहुत बड़ा बादशाह , उसकी गूंज दूर तक जाती है। सहीह बुख़ारी में दर्ज एक मशहूर हदीस में, हमें एक ऐसी ही ऐतिहासिक मुलाक़ात का विवरण मिलता है जो रोमन बादशाह  हिरक़ल (Heraclius) और मक्का के क़बीले क़ुरैश के सरदार अबू सुफ़यान बिन हर्ब के बीच हुई थी।

यह मुलाक़ात तब हुई जब इस्लाम के पैगंबर, मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम), ने दुनिया के शासकों को इस्लाम का निमंत्रण देते हुए दावत दी ।

🌍  बादशाह के दरबार में क़ुरैश का सरदार

यह घटना तब की है जब क़ुरैश और पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बीच एक  अहद था। अबू सुफ़यान, जो उस समय तक इस्लाम क़बूल नहीं किए थे और पैगंबर के विरोधी थे, तिजारत के लिए मुल्क-ए-शाम (सीरिया) में थे।

बादशाह हिरक़ल को जब पैगंबर का पत्र मिला, तो उन्होंने अपने दरबार में उस क़ाफ़िले से एक आदमी को बुलाने का आदेश दिया जो दावा करने वाले (मुद्दई-ए-रिसालत) का सबसे क़रीबी रिश्तेदार हो। इस पर अबू सुफ़यान सामने आए।

👉 हिरक़ल का आदेश: हिरक़ल ने अबू सुफ़यान को अपने सामने बिठाया और उनके साथियों को उनके पीछे बिठा दिया। उसने अपने अनुवादक (तर्जुमान) से कहा कि वह अबू सुफ़यान से पूछे गए सवालों पर पूरा ध्यान रखे, ताकि अगर वह झूठ बोले तो उसके साथी पीछे से उसको झुठला सकें।

👉 हिरक़ल के सात निर्णायक प्रश्न

हिरक़ल ने बहुत ही बुद्धिमानी से सात प्रश्न पूछे, जिनका उद्देश्य पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सच्चाई और उनके मिशन की जाँच करना था।

| क्र. | हिरक़ल का प्रश्न | अबू सुफ़यान का जवाब | सच्चाई की परख |

| 1 | उनका नसब (वंश) कैसा है? | जवाब: आली (उत्तम) नसब वाले हैं। | परख: पैगंबर हमेशा आली नसब में भेजे जाते हैं। |

| 2 | क्या उनके ख़ानदान में कोई बादशाह गुज़रा है? | जवाब: नहीं। | परख: अगर ऐसा होता, तो लोग उन पर सल्तनत वापस पाने का इल्ज़ाम लगा सकते थे। |

| 3 | क्या उनके मानने वाले बढ़ रहे हैं या घट रहे हैं? | जवाब: बढ़ रहे हैं। | परख: ईमान की यही ख़ासियत होती है कि वह बढ़ता है। |

| 4 | क्या उनके मानने वालों में कोई नाराज़ होकर दीन छोड़ देता है? | जवाब: नहीं। | परख: ईमान की मिठास दिलों में बस जाती है। |

| 5 | क्या उन्होंने कभी पैग़म्बरी के दावे से पहले झूठ बोला है? | जवाब: नहीं। | परख: जो आदमी लोगों के साथ झूठ नहीं बोलता, वह अल्लाह पर झूठ नहीं बोलेगा। |

| 6 | उनका और तुम्हारा जंग का हाल कैसा होता है? | जवाब: कभी हम जीतते हैं और कभी वे। | परख: पैगंबरों को आज़माया जाता है, लेकिन आख़िरी जीत उन्हीं की होती है। |

| 7 | वे तुम्हें किस चीज़ का हुक्म देते हैं? | जवाब: सिर्फ अल्लाह की इबादत, शिर्क से मना करना, नमाज़, सच बोलना, पाक़ीज़गी, और सिलह-रहमी (रिश्तेदारों से अच्छा सुलूक)। | परख: यह तमाम बातें पैगंबरों की तालीम हैं। |

💡हिरक़ल का निर्णायक बयान और अंतिम फैसला

सवालों के जवाब सुनकर, हिरक़ल ने अबू सुफ़यान को संबोधित करते हुए कहा कि, अगर तुम्हारी बातें सच हैं, तो "वह (पैगंबर) मेरे पैरों की जगह का मालिक हो जाएगा।" उसने यह भी बताया कि इल्म-ए-नुजूम (भविष्यवाणी/आसमान के हाल) से उसे मालूम था कि एक पैगंबर ज़ाहिर हो चुका है।

इसके बाद, हिरक़ल ने पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का पत्र पढ़कर सुनाया, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा था: ⚡"अल्लाह के नाम के साथ जो निहायत मेहरबान और रहमवाला है। अल्लाह के बंदे और उसके पैग़म्बर मुहम्मद की तरफ़ से, ये ख़त अज़ीम-ए-रूम (रोमन बादशाह) हिरक़ल को है। उस शख़्स पर सलाम जो हिदायत की पैरवी करे। ... इस्लाम पेश करता हूँ... ऐ अहले किताब! एक ऐसी बात पर आ जाओ जो हमारे और तुम्हारे बीच एक जैसी है: कि हम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करें..."

👉अबू सुफ़यान कहते हैं कि जब हिरक़ल ने अपनी बात ख़त्म की, तो दरबार में शोर-ओ-गुल मच गया और उन्हें बाहर निकाल दिया गया।

हिरक़ल ने आख़िर में अपने दरबारियों को नसीहत दी कि अगर वे अपनी सल्तनत और कामयाबी चाहते हैं, तो नबी की बैअत करके मुसलमान हो जाएँ। हालांकि, दरबारियों ने नफ़रत और मायूसी का इज़हार किया।

🤲यह हदीस न सिर्फ़ इस्लाम की तालीम के हक़ को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि एक गैर-मुस्लिम बादशाह ने भी निष्पक्ष जाँच के बाद पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सच्चाई को क़बूल किया। हिरक़ल ने इस्लाम स्वीकार नहीं किया, लेकिन उसने हक़ को पहचान लिया। अबू सुफ़यान ने, जो उस समय पैगंबर के विरोधी थे, मजबूरी में सच्चाई बयान की, जिसके ज़रिए अल्लाह ने अपने पैगंबर की गवाही दिलाई |

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